मैं क्यों लिखता हूं Class 10 Hindi Summary – कृतिका भाग 2

NCERT Solution of Class 10 Hindi कृतिका भाग 2  मैं क्यों लिखता हूं पाठ का सार for Various Board Students such as CBSE, HBSE, Mp Board,  Up Board, RBSE and Some other state Boards. We also Provides पाठ का सार और महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर for score Higher in Exams.

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NCERT Solution of Class 10th Hindi Kritika bhag 2/  कृतिका भाग 2 Main Kyon Likhta Hu / मैं क्यों लिखता हूं Summary / पाठ का सार Solution.

मैं क्यों लिखता हूं Class 10 Hindi  पाठ का सार ( Summary )

प्रस्तुत पाठ अज्ञेय द्वारा लिखित है। इस पाठ में अज्ञेय ने अपने लिखने के कारणों पर प्रकाश डाला है। लेखक क्यों लिखता है यह प्रश्न बहुत कठिन है। इसका उत्तर देते हुए लेखक कहता है कि मैं इसलिए लिखता हूं कि स्वयं जानना चाहता हूं कि क्यों लिखता हूं लिखे बिना इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल सकता। लिखकर ही लेखक उस अभ्यांतर व्यवस्था को पहचानता है जिसके कारण उसने लिखा। अज्ञेय भी उस आंतरिक व्यवस्था से मुक्ति पाने के लिए तटस्थ होकर उसे देखने और पहचान लेने के लिए लिखता है। कुछ लेखक प्रसिद्धि मिल जाने के बाद कुछ बाहर की व्यवस्था से भी लिखते हैं। बाहर का दबाव वास्तव में दबाव नहीं बल्कि भीतरी प्रकाश होता है।
लेखन में रचनाकार के स्वभाव और आत्मानुशासन का बहुत अधिक महत्व होता है। कुछ लेखक बाहरी दबाव के बिना लिख ही नहीं पाते अज्ञेय उनकी तुलना करते हुए कहता है कि वे उन व्यक्तियों के समान है जो आंख खुल जाने के बाद भी घड़ी के अलार्म बजने का इंतजार करते हैं। अज्ञेय को कभी बाहरी दबाव की जरूरत नहीं पड़ी।
अज्ञेय भीतरी विवशता का वर्णन करते हुए अपने जीवन के बारे में बताता है कि वह विज्ञान का विद्यार्थी रहा है। उसे अणु और रेडियोधर्मिता का पुस्तकीय ज्ञान तो था पर जब हिरोशिमा में अणु बम गिरा तो उसके प्रभावों का ऐतिहासिक प्रमाण भी सामने आ गया। विज्ञान के दुरुपयोग के प्रति लेखक की बुद्धि का विद्रोह संभव था इसीलिए लेखक ने बौद्धिक व्यवस्था के कारण नहीं अनुभूति के कारण लेख लिखा। लेखक एक उदाहरण देते हुए कहता है कि युद्ध मे सैनिक बेवजह हजारों मछलियां मार देते हैं जबकि उन्हें थोड़ी सी मछलियों की आवश्यकता होती है।
जब लेखक जापान गया तो वह हिरोशिमा के अस्पताल में भी गया और अणु बम से आहत लोगों को देखकर दुख का अनुभव हुआ। लेखक को प्रत्यक्ष अनुभव भी हुआ पर वह अनुभव से ज्यादा अनुभूति को मानते थे क्योंकि अनुभूति संवेदना और कल्पना के सहारे उस सत्य को पा लेती है जो वास्तव में रचनाकार के सामने कभी हुआ ही नहीं। फिर एक दिन सड़क पर लेखक ने जले हुए पत्थर पर जली उजली छाया देखी। विस्फोट के समय कोई वहां खड़ा रहा होगा और रेडियोधर्मी पदार्थ की किरणों ने पत्थर को झुलसा दिया और उस व्यक्ति को भाप बनाकर उड़ा दिया होगा। उस समय लेखक को प्रत्यक्ष अनुभूति हुई कि मैं स्वयं हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता बन गया। इसी से लेखक के मन में विवशता जागी जिसने उसको लिखने के लिए प्रेरित किया।अज्ञेय ने हिरोशिमा पर भारत लौट कर रेलगाड़ी में बैठे-बैठे एक कविता लिखी। यह कविता अच्छी है या बुरी इसके बारे में लेखक को नहीं पता परंतु लेखक ने अपनी अनुभूति प्रकट की है।

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