(i) आत्मपरिचय, (ii) एक गीत Class 12 Hindi लेखक जीवन परिचय – आरोह भाग 2

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NCERT Class 12 Hindi (i) आत्मपरिचय, (ii) एक गीत / aatamparichay ek geet Lekhak jivan Parichay / लेखक जीवन परिचय of Aroh Bhag 2 Solution.

(i) आत्मपरिचय, (ii) एक गीत Class 12 Hindi Jivan Parichay

हरिवंश राय बच्चन जीवन परिचय

1. सामान्य जीवन परिचय :-

  • जन्म – 21 नवंबर सन 1957 ई० को
  • स्थान – उत्तर प्रदेश के प्रयाग के कटरा मुहल्ले में
  • परिवार – कायस्थ परिवार में
  • पिता का नाम – श्री प्रताप नारायण बच्चन जी
  • माता का नाम – श्रीमति सरस्वती देवी
  • शिक्षा – प्रारंभिक शिक्षा म्युनिसिपल स्कूल, कायस्थ पाठशाला गवर्नमेंट स्कूल में तथा उच्च शिक्षा प्रयाग विश्वविद्यालय में, M.A अंग्रेजी एवं P.H.D की उपाधि कैंब्रिज विश्वविद्यालय से।
  • विशेष कार्यक्षेत्र – 1942 से 1952 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय मे प्राध्यापक के पद पर कार्यरत रहे। सन 1955 ई. मे भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ के पद पर नियुक्त किया।
  • जीवन के अंतिम क्षण – स्वतंत्र लेखन ।
  • देहावसान – 18 जनवरी सन् 2003 में मुम्बई मे।

2. साहित्यिक रचनाएँ :- श्री हरिवंशराय बच्चन जी बहुमुखी प्रतिभा के संपन्न साहित्यकार है। उन्होंने यर्थाथ वादि दृष्टिकोण अपनाकर अनेक विधाओं पर सफल लेखनी चलाई है। इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित है→

(i) काव्य संग्रह — मधुशाला (सन् 1935), मधुबाला (सन 1938), मधुकला (सन् 1938), निशानिमंत्रण, एकांत संगीत आकुल-उंसर, मिलन यामिनी, सतरंगीणी, नए पुराने झसेस, आरती और अंगारे, टूटी-फूटी कड़ियां, बुद्ध और नाथगर।
(ii) अनुवाद — हेमलेट, जनगीता, मैकबेथ।
(iii) डायरी — प्रवास की डायरी |
(iv) आत्मा चार खंड — भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण, फिर बसेरे से दूर, दश द्वार से सोपान तक।

3. सम्मान :- दशद्वार से सोपान तक’ (सरस्वती सम्मान), ‘दो चट्टान ( साहित्य अकादमी पुरस्कार )। इनकी विशेष प्रतिमा और साहित्य सेवा को देखकर भारत सरकार ने इनको ‘पद्म भूषण’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

4. साहित्यिक विशेषताएँ :- हालाबाद के प्रवर्तक कहे जानेवाले हरिवंशराय बच्चनजी हमे प्रेम, सौंदर्य, मस्ती, व्यक्तिनिष्ठ मानवतावाद, आशा और सृजन, सामाजिक यथार्थ के प्रमुख कवि के रूप में उभर कर हमारे सामने अपनी रचनाओं के द्वारा छटा बिखेरते हैं।

5. भाषा शैली :- हरिवंश राय बच्चन की भाषा आमबोलचाल की खड़ी बोली हिंदी भाषा है। इन्होंने तत्सम तद्भव शब्दावली के साथ-साथ विदेशी भाषा के शब्दो का भी प्रयोग किया है। भाषा में चित्र विधा की शक्ति तथा प्रतीक शब्द योजना भी है। गेय होने के कारण इनकी रचनाओं को गीत के रूप में मान्यता प्राप्त है यही कारण है कि आधुनिक गीतकारों में उनका प्रमुख स्थान है।

अलंकार :- बच्चन जी ने अपनी कविताओं में आडंबर हीन भाषा का प्रयोग किया है तथा अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग किया है। इनके प्रिय अलंकार है – अनुप्रास, रूपक, यमक, उत्प्रेक्षा और मानवीकरण आदि।

रस :- बच्चन जी प्रेम और सौंदर्य के कवि है इन्होंने अपनी कविताओं में श्रृंगार रस का प्रयोग किया है परंतु श्रंगार रस के संयोग पक्ष की अपेक्षा उनका मन वियोग पक्ष में अधिक रमा है रहस्य आत्मकथा को प्रकट करने के लिए शांत रस की भी अभिव्यंजना की है।

निष्कर्ष :- हरिवंश राय बच्चन जी हिंदी साहित्य के लोकप्रिय कवि माने जाते हैं। अपनी कविताओं के जरिए उन्होंने काव्य के क्षेत्र में वृद्धि की है संभवत हिंदी साहित्य में उनका स्थान अद्वितीय हैं।

By Mam – Shakuntla Sindhu 

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