कैमरे में बंद अपाहिज Class 12 Hindi लेखक जीवन परिचय – आरोह भाग 2

Class 12 Hindi NCERT Solution for पाठ 4 कैमरे में बंद अपाहिज लेखक जीवन परिचय. Here we Provide Class 1 to 12 all Subject Solution like notes, Question Answer, Summary, Important Question Answer, MCQ for CBSE, HBSE, Mp Board,  Up Board, RBSE and Some other state Boards.

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NCERT Class 12 Hindi Chapter 4 कैमरे में बंद अपाहिज / Camera mein Bandh Apahij Lekhak jivan Parichay / लेखक जीवन परिचय of Aroh Bhag 2 Solution.

कैमरे में बंद अपाहिज Class 12 Hindi Jivan Parichay

रघुवीर सहाय जीवन परिचय


1. सामान्य जीवन परिचय :-

  • कवि का नाम – रघुवीर सहाय ( बीसवीं सदी के उत्तरार्ध के महत्वपूर्ण कवि )
  • पिताजी का नाम – हरदेव सहाय ( साहित्य के अध्यापक )
  • कवि का जन्म – 9 दिसंबर 1929 को लखनऊ में हुआ था।
  • माता जी का नाम – श्रीमती तारा देवी।
  • शिक्षा – आरंभिक शिक्षा स्थानीय पाठशाला तथा उच्च शिक्षा 1951 में लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर ( एम० ए० ) परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
  • रचना का आरंभ – 1946 से।
  • कार्यकाल – प्रमुख व्यवसाय के रूप में पत्रकारिता को चुना। 1949 से 1951 तक ‘दैनिक नवजीवन’ को अपनी सेवाएं दी। 1953 से 1967 तक वे आकाशवाणी से जुड़े रहे। 1967 से 1982 तक दिनमान साप्ताहिक पत्रिका के प्रधान संपादक रहे, बाद में स्वतंत्र लेखन को अपनाया।
  • देहावसान – 30 दिसंबर 1990 में इस महान कवि का निधन हो गया।

2. साहित्यिक रचनाएँ :-

प्रमुख रचनाएं – रघुवीर सहाय जी 1951 में अज्ञेय द्वारा संपादित ‘दूसरा सप्तक’ में रची गई रचनाओं के कारण चर्चा में आए थे।

पहला काव्य संग्रह –

  • सीढ़ियों पर धूप में (1960)
  • आत्महत्या के विरुद्ध (1967)
  • हंसो हंसो जल्दी हंसो (1975)
  • लोग भूल गए हैं (1982)
  • कुछ पत्ते कुछ चिड़िया (1989)
  • प्रतिनिधि कविताएं (1994)

रघुवीर जी का संपूर्ण काव्य रघुवीर सहाय रचनावली के नाम से प्रकाशित है।


3. काव्यगत विशेषताएं – रघुवीर सहाय जी ने अपनी काव्य कृतियों में राजनीतिक चेतना के साथ-साथ आधुनिक युग में उत्पन्न विभिन्न समस्याओं पर जमकर अपनी लेखनी चलाई है। रघुवीर जी की काव्यगत विशेषताएं निम्न प्रकार से हैं—

    1. राजनीतिक चेतना :- रघुवीर सहाय जी पत्रकारिता से जुड़े हुए थे तो इस कारण उनकी कविताओं में राजनीतिक चेतना सहज रूप से देखी जा सकती है। राजनीति में व्याप्त बुराइयों का वर्णन सहज रूप से देखा जा सकता है। कवि कहता है कि राजनीति ने देश में हिंसा, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, जाती-पाती जैसे भयंकर बुराइयों को जन्म दिया है। कवि ने बेखौफ होकर भ्रष्ट मंत्रियों को बेनकाब किया है। इसीलिए डॉक्टर हरिवंश राय बच्चन जी ने रघुवीर सहाय जी को पॉलिटिकल कवि कहा है।
    2. सामाजिक चेतना :- कवि जनसाधारण के पक्ष में खड़े हुए हैं। कवि की कविताओं ने समाज में उत्पन्न विरोध, विचारों में समानता को प्रकट किया है। कवि ने लोकतांत्रिक जीवन के कारण मध्यवर्ग जीवन के दबाव का वर्णन किया है। कवि आम आदमी के विचारों व उनकी सामाजिक दशा का वर्णन करने के पक्षधर दिखाई देते हैं।
    3. मानवीय मूल्य, आक्रोश और व्यंग्य का उद्घाटन :- कवि सहाय जी ने मानवीय संबंधों की व्यथा को अपनी काव्य रचना में उकेरा है। कवि ने स्त्री जीवन में व्याप्त उसके दुख, पीड़ा, मनोव्यथा को प्रस्तुत किया है। कवि ने चेहरा नामक कविता में एक लड़की की गरीबी का वर्णन किया है। कवि सहाय जी ने स्त्री व पुरुष की मनोदशा का वर्णन किया है। समाज में जाति पाति के कारण मनुष्य के मध्य उत्पन्न आक्रोश को उजागर व इसके कारण समाज में उत्पन्न  असमानता पर गहरा कटाक्ष किया है।
    4. भाषा शैली :- श्री रघुवीर सहाय जी की भाषा आम बोलचाल की सरल, सहज व धाराप्रवाह खड़ी बोली है। इनके शब्दावली में तद्भव शब्दों की प्रचुरता के साथ-साथ तत्सम, देसी, विदेशी शब्दों का भी समायोजन देखने को मिलता है। ये लोकोक्तियां एवं मुहावरे का प्रयोग करने में सिद्धार्थ हैं। इनकी भाषा में अनुप्रास, यमक, रूपक, उपमा, उत्प्रेक्षा, मानवीकरण आदि अलंकारों का उचित प्रयोग किया है। व्यंग्यात्मकता इनकी भाषा का सहज गुण है। दृश्य बिंब इनका प्रिय बिंब है। भाषा अनुपम व भावप्रदान है।

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