शुचिपर्यावरणम् Class 10 संस्कृत Chapter 1 Translation in Hindi ( व्याख्या ) – शेमुषी NCERT Solution

NCERT Solution of Class 10 Sanskrit शेमुषी शुचिपर्यावरणम् व्याख्या  for Various Board Students such as CBSE, HBSE, Mp Board,  Up Board, RBSE and Some other state Boards. Class 10 Sanskrit all Chapters NCERT Solution with शब्दार्थ, व्याख्या, Translation in Hindi and English, अभ्यास के प्रश्न उत्तर and important Question answer ncert solution.

Also Read:Class 10 Sanskrit शेमुषी NCERT Solution

NCERT Solution of Class 10th Sanskrit shemushi शेमुषी  Chapter 1 शुचिपर्यावरणम् / suchi paryavaran Vyakhya / व्याख्या /  meaning in hindi / translation in hindi Solution.

शुचिपर्यावरणम् Class 10 Sanskrit Chapter 1 व्याख्या


दुर्वहमत्र जीवितं जातं प्रकृतिरेव शरणम् ।
शुचि-पर्यावरणम्॥

अन्वय: – अत्र जीवितं दुर्वहं जातम्, प्रकृतिः एव शरणम् । शुचिपर्यावरणम् (स्यात् ) ।

शब्दार्थदुर्वहमत्र – ( दुर्वहम् – कठिन। + अत्र – यहां।) जीवितं – जीवन। जातं – हो गया है। प्रकृतिरेव – प्रकृति ही। शरणम् – आश्रय हैं/ शरण है। शुचि-पर्यावरणम् – स्वच्छ पर्यावरण।

Translation in Hindi – यहां जीवन कठिन हो गया है। अब तो प्रकृति की ही शरण है। स्वच्छ पर्यावरण हो।

Translation in English – Life has become difficult here. Now it is the refuge of nature itself. Have a clean environment.


महानगरमध्ये चलदनिशं कालायसचक्रम्।
मनः शोषयत् तनुः पेषयद् भ्रमति सदा वक्रम्॥
दुर्दान्तैर्दशनैरमुना स्यान्नैव जनग्रसनम् । शुचि… ॥1॥

अन्वय: – महानगर मध्ये कालायसचक्रम् अनिशं चलत् मनः शोषयत्, तनुः पेषयत् सदा वक्रं भ्रमति। अमुना दुर्दान्तैः दशनैः जनग्रसनं न एव स्यात् ।

शब्दार्थमहानगरमध्ये – महानगरों में। चलदनिशं – दिन रात चलता हुआ। कालायसचक्रम् – लोहे का पहिया। मनः – मन को। शोषयत् – शोषण करता हुआ। तनुः – शरीर को। पेषयद् – पीसता हुआ। भ्रमति – चलता है। सदा – हमेशा। वक्रम् – टेढ़ा। दुर्दान्तैर्दशनैरमुना – इसके भयंकर दांतो से। स्यान्नैव – नहीं होना चाहिए। जनग्रसनम् – लोगों का विनाश।

Translation in Hindi – महानगरों में दिन-रात चलता हुआ लोहे का पहिया मन का शोषण करता हुआ, शरीर को पीसता हुआ, हमेशा टेढ़ा चल रहा है। इसके भयंकर दांतो से लोगों का विनाश नहीं होना चाहिए

Translation in English – Running day and night in the metropolis, the iron wheel exploiting the mind, grinding the body, is always running crooked. People should not be destroyed by its terrible teeth.


कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति शतशकटीयानम्।
वाष्पयानमाला संधावति वितरन्ती ध्वानम् ॥
यानानां पङ्क्तयो ह्यनन्ताः कठिनं संसरणम् । शुचि…॥2॥

अन्वय: – शतशकटीयानं कज्जलमलिनं धूमं मुंचति । वाष्पयानमाला ध्वानं वितरन्ती सन्धावति। यानानां अनन्ताः पंक्तयः, हि संसरणं कठिनम्।

शब्दार्थकज्जलमलिनं – काजल जैसा काला। धूमं – धुंआ। मुञ्चति – छोड़ती हैं। शतशकटीयानम् – सैकड़ों मोटर गाड़ियां। वाष्पयानमाला – भाप से चलने वाली गाड़ियों की पंक्ति / रेलगाड़ी। संधावति – दौड़ती है। वितरन्ती – कोलाहल करती हुई। ध्वानम् – ध्वनि। यानानां – वाहनों की। पङ्क्तयो – पंक्तियां। ह्यनन्ताः – निश्चित रूप से अनंत।  कठिनं – कठिन है। संसरणम् – चलना।

Translation in Hindi – सैकड़ों मोटर गाड़ियां काजल जैसा काला धुआं छोड़ती हैं। रेलगाड़ियां कोलाहल करती हुई दोड़ती हैं। वाहनों की अनंत पंक्तियां हैं। इसलिए यहां चलना भी कठिन है।

Translation in English – Hundreds of motor vehicles emit black smoke like mascara. Trains run with a ruckus. There are infinite rows of vehicles. So it is difficult to walk here.


वायुमण्डलं भृशं दूषितं न हि निर्मल जलम्।
कुत्सितवस्तुमिश्रितं भक्ष्यं समलं धरातलम् ॥
करणीयं बहिरन्तर्जगति तु बहु शुद्धीकरणम् । शुचि… ॥3॥

अन्वय: – वायुमण्डलं भृशं दूषितम् । निर्मलं जलं हि न (अस्ति)। भक्ष्यं कुत्सितवस्तुमिश्रितम्। धरातलं समलं (जातम्) । बहिः अन्तः जगति बहु शुद्धीकरणं तु करणीयम् ।

शब्दार्थवायुमण्डलं – वायुमंडल। भृशं – अत्याधिक। दूषितं – प्रदूषित हो गया है। न – नहीं। हि – निश्चित रूप से। निर्मल – स्वच्छ। जलम् – जल। कुत्सितवस्तुमिश्रितं – बुरी वस्तुओं की मिलावट की गई है। भक्ष्यं – खाने की वस्तुएं। समलं – प्रदूषित। धरातलम् – धरातल/पृथ्वी। करणीयं – करना चाहिए। बहिरन्तर्जगति – बाहरी और आंतरिक संसार में। तु – तो। बहु – अत्यधिक। शुद्धीकरणम् – शुद्धीकरण।

Translation in Hindi – वायुमंडल अत्यधिक प्रदूषित हो गया है। जल भी निश्चित रूप से स्वच्छ नहीं है। खाने की वस्तुओं में बुरी चीजों की मिलावट हों गई है। पृथ्वी भी प्रदूषित हो गई है। अतः संसार में बाहरी और आंतरिक शुद्धिकरण की अत्याधिक आवश्यकता है।

Translation in English – The atmosphere has become highly polluted. The water is definitely not clean either. Bad things have become adulterated in the food items. The earth has also become polluted. Therefore, there is a great need for external and internal purification in the world.


कञ्चित् कालं नय मामस्मान्नगराद् बहुदूरम् ।
प्रपश्यामि ग्रामान्ते निर्झर – नदी – पयःपूरम् ॥
एकान्ते कान्तारे क्षणमपि मे स्यात् सञ्चरणम् । शुचि…॥4॥

अन्वय: – माम् कंचित् कालं अस्मात् नगरात् बहुदूरं नय। (अहम्) ग्रामान्ते निर्झर–नदी–पयःपूरं प्रपश्यामि । एकान्ते कान्तारे क्षणम् अपि मे संचरणं स्यात् ।

शब्दार्थ कञ्चित् – कुछ। कालं – समय के लिए। नय – ले चलो। मामस्मान्नगराद् – मुझे इस नगर से। बहुदूरम् – बहुत दूर। प्रपश्यामि – देखना चाहता हूं। ग्रामान्ते – गांव की सीमा पर। निर्झर – झरने। नदी – नदी। पयःपूरम् – तालाब आदि। एकान्ते – एकांत। कान्तारे – वन में। क्षणमपि – थोड़ी देर के लिए। मे – मेरा। स्यात् – हो। सञ्चरणम् – भ्रमण।

Translation in Hindi – मुझे इस नगर से कुछ समय के लिए बहुत दूर ले चलो। मैं गांव की सीमा पर झरने, नदी, तालाब आदि देखना चाहता हूं। एकांत वन में थोड़ी देर के लिए मेरा भ्रमण हो।

Translation in English – Take me far away from this city for a while. I want to see waterfalls, rivers, ponds etc. on the boundary of the village. Let me visit for a while in a lonely forest.


हरिततरूणां ललितलतानां माला रमणीया।
कुसुमावलिः समीरचालिता स्यान्मे वरणीया ॥
नवमालिका रसालं मिलिता रुचिरं संगमनम्। शुचि… ॥5॥

अन्वय: – हरित-तरूणां ललित-लतानां माला रमणीया, समीरचालिता कुसुमावलिः मे वरणीया स्यात् । नवमालिका रसाल मिलिता रुचिरं संगमनम् (स्यात्) ।

शब्दार्थहरिततरूणां – हरे भरे पेड़ों की। ललितलतानां – सुंदर लताओं की। माला – पंक्तियां। रमणीया – सुंदर हैं। कुसुमावलिः – फूलों की पंक्तियां। समीरचालिता – हवा से हिलती हुई। स्यान्मे – मेरे लिए हो। वरणीया – चुनने योग्य। नवमालिका – नई चमेली की बेल। रसालं – आम। मिलिता – मिलकर। रुचिरं – सुंदर। संगमनम् – संगम ।

Translation in Hindi – हरे-भरे पेड़ों और सुंदर लताओं की पंक्तियां सुंदर हैं और हवा से हिलती हुई फूलों की पंक्तियां मेरे लिए चुनने योग्य हो। आम के पेड़ से चमेली की नई बेल मिलकर सुंदर संगम बनाती हो।

Translation in English – The rows of lush trees and beautiful vines are beautiful and may the rows of flowers shaken by the wind be my choosing. A new jasmine vine mixes with a mango tree to form a beautiful confluence.


अयि चल बन्धो! खगकुलकलरव गुञ्जितवनदेशम्।
पुर- कलरव सम्भ्रमितजनेभ्यो धृतसुखसन्देशम् ॥
चाकचिक्यजालं नो कुर्याज्जीवितरसहरणम्। शुचि…॥6॥

अन्वय: – अयि बन्धो! खगकुल- कलरव – गुंजित-वनदेशं चल । पुर- कलरव – सम्भ्रमित जनेभ्यः धृत-सुखसन्देशम् । चाकचिक्य-जालं जीवित–रसहरणम् नो कुर्यात् |

शब्दार्थअयि – हे। चल – चलो। बन्धो – बंधु/ भाई। खगकुलकलरव – पक्षियों के समूह की चहक। गुञ्जितवनदेशम् – गूंजता हुआ वन प्रदेश/ बोलता हुआ जंगल। पुर – शहर। कलरव – शोरगुल। सम्भ्रमितजनेभ्यो – परेशान लोगों के लिए। धृतसुखसन्देशम् – धारण करो सुख का संदेश। चाकचिक्यजालं – चकाचौंध भरी दुनिया। नो – नहीं। कुर्याज्जीवितरसहरणम् – जीवन का आनंद छीनना चाहिए। / जीवन के आनंद का हरण करें।

Translation in Hindi – हे बंधु! पक्षियों के शंभू की चहक से गूंजते हुए जंगल में चलो। शहर के शोरगुल से परेशान लोगों के लिए सुख का संदेश धारण करो। चकाचौंध भरी दुनिया जीवन का आनंद का हरण नहीं करें।

Translation in English – O brother! Walk in the forest reverberating with the chirping of birds. Wear a message of happiness to the people troubled by the hustle and bustle of the city. Don’t let the dazzling world take away the joy of life.


प्रस्तरतले लतातरुगुल्मा नो भवन्तु पिष्टाः।
पाषाणी सभ्यता निसर्गे स्यान्न समाविष्टा ॥
मानवाय जीवनं कामये नो जीवन्मरणम्। शुचि… ॥7॥

अन्वय: – लता – तरु- गुल्माः प्रस्तरतले पिष्टाः न भवन्तु । पाषाणी सभ्यता निसर्गे समाविष्टा न स्यात् । मानवाय जीवनं कामये । जीवन् मरणं नो (कामये) ।

शब्दार्थ – प्रस्तरतले – पत्थरों के नीचे। लतातरुगुल्मा ( लता + तरु + गुल्मा) – लताएं, पेड़ और झाड़ियां। नो – नहीं। भवन्तु – हो। पिष्टाः – पीसना। पाषाणी – पत्थरों की। सभ्यता – सभ्यता। निसर्गे – प्रकृति में। स्यान्न – न हो। समाविष्टा – सम्मिलित। मानवाय – मानव के लिए। जीवनं – जीवन। कामये – कामना करता हूं। नो – नहीं। जीवन्मरणम् – जीवित रहता हुआ मृत्यु को।

Translation in Hindi – लताएं, पेड़ तथा झाड़ियां पत्थरों के नीचे ना पीछे। प्रकृति में पत्थर की सभ्यता ( पाषाण सभ्यता ) सम्मिलित ना हो। मैं मानव के जीवन के लिए कामना करता हूं। जीवित रहते हुए मृत्यु की कामना नहीं करता हूं।

Translation in English – Do not follow vines, trees and shrubs under the stones. The stone civilization should not be included in the nature. I wish for human life. I do not wish to die while I am alive.


 

Leave a Comment

error: cclchapter.com